
Vijay Hazare Trophy: विदर्भ ने आखिरकार भारत की घरेलू वनडे क्रिकेट में अपने सुनहरे सपने को साकार कर लिया। रविवार को बेंगलुरु के सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में खेले गए फाइनल मुकाबले में विदर्भ ने सौराष्ट्र को 38 रन से हराकर पहली बार विजय हजारे ट्राफी जीत ली। इसके साथ ही उसने सौराष्ट्र को खिताबी हैट्रिक लगाने से भी रोक दिया।
रेड-बॉल क्रिकेट में लंबे समय से मजबूत प्रदर्शन करने वाली विदर्भ टीम अब तक सीमित ओवरों की ट्रॉफी से वंचित रही थी, लेकिन इस बार उन्होंने इतिहास बदल दिया। पिछले सीजन फाइनल में कर्नाटक से हारने के बाद टीम का दिल टूट गया था, लेकिन उन्होंने उस दर्द को अपनी ताकत बनाया। इस बार विदर्भ ने मौके को हाथ से जाने नहीं दिया।
जीत के बाद खिलाड़ियों और सपोर्ट स्टाफ के जश्न ने साफ कर दिया कि यह सफलता उनके लिए कितनी खास है। वर्षों की मेहनत, बार-बार नाकामियां और अटूट विश्वास आखिरकार रंग लाए।फाइनल मुकाबले में विदर्भ को पहले बल्लेबाजी का मौका मिला और उन्होंने बड़ा स्कोर खड़ा कर दिया।
अथर्व तायडे की शानदार शतकीय पारी और यश राठौड़ के साथ उनकी 133 रनों की साझेदारी की बदौलत विदर्भ ने 317 रनों का मजबूत लक्ष्य रखा। जवाब में सौराष्ट्र की शुरुआत खराब रही। नई गेंद से यश ठाकुर और नचिकेत भूटे ने दोनों ओपनर्स को जल्दी पवेलियन भेज दिया। हालांकि प्रेरेक मांकड़ ने एक छोर संभाले रखा और विकेट गिरने के बावजूद संघर्ष करते रहे। इसके बाद चिराग जानी ने उनके साथ मिलकर रन गति बढ़ाने की कोशिश की, जिससे सौराष्ट्र की उम्मीदें बनी रहीं।
लेकिन मैच का टर्निंग पॉइंट तब आया जब दुबे ने मांकड़ को 88 रन पर आउट कर इस अहम साझेदारी को तोड़ दिया। जानी ने कुछ देर संघर्ष जारी रखा, लेकिन 45वें ओवर में वह भी आउट हो गए। इसके बाद सौराष्ट्र की जीत की सारी उम्मीदें खत्म हो गईं। टीम 48.5 ओवर में 279 रन ही बना सकी।
विदर्भ की इस ऐतिहासिक जीत में गेंदबाजों का सामूहिक योगदान अहम रहा। तेज गेंदबाज यश ठाकुर, नचिकेत भूटे और नालकंडे ने मिलकर नौ विकेट झटके, जबकि स्पिनरों दुबे और रेखाड़े ने भी प्रभावी भूमिका निभाई।




