
Ranji trophy semifinal: जम्मू-कश्मीर ने रणजी ट्रॉफी के सेमीफाइनल में दो बार के पूर्व चैंपियन बंगाल को छह विकेट से हराकर अपने 67 साल के क्रिकेट इतिहास में पहली बार फाइनल में प्रवेश कर ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की। चौथे दिन 126 रन के लक्ष्य का पीछा करते हुए टीम ने 34.4 ओवर में चार विकेट खोकर जीत दर्ज की।
वंशज शर्मा ने नाबाद 43 और अब्दुल समद ने नाबाद 30 रन बनाकर टीम को यादगार जीत दिलाई।इस जीत की बुनियाद तेज गेंदबाज आकिब नबी ने रखी, जिन्होंने मैच में कुल नौ विकेट चटकाकर बंगाल की उम्मीदों को ध्वस्त कर दिया।
नबी के प्रभावशाली प्रदर्शन के साथ आईपीएल स्टार अब्दुल समद की निर्भीक बल्लेबाजी ने साबित कर दिया कि जम्मू-कश्मीर अब कमजोर टीम नहीं रहा। वंशज शर्मा ने मुकेश कुमार की गेंद पर लॉन्ग ऑन के ऊपर छक्का लगाकर जीत की मुहर लगाई और टीम में जश्न का माहौल बन गया।1959-60 में रणजी ट्रॉफी में पदार्पण करने वाली जम्मू-कश्मीर की टीम को लंबे समय तक मजबूत दावेदार नहीं माना गया। इस सत्र से पहले खेले गए 334 मैचों में उसे केवल 45 जीत मिली थीं। पहली जीत के लिए भी उसे 44 साल इंतजार करना पड़ा था।
हालांकि 2015-16 में परवेज रसूल की कप्तानी में मुंबई को हराकर टीम ने अपनी क्षमता का संकेत दिया था, लेकिन निरंतरता की कमी बनी रही।इस सत्र में कोच अजय शर्मा और कप्तान पारस डोगरा के नेतृत्व में टीम ने खुद को बदला। मुंबई के खिलाफ शुरुआती हार के बाद राजस्थान, दिल्ली और हैदराबाद पर जीत दर्ज कर नॉकआउट में जगह बनाई।
क्वार्टर फाइनल में मध्य प्रदेश को हराने के बाद सेमीफाइनल में बंगाल जैसी मजबूत टीम को पछाड़ना टीम के आत्मविश्वास का प्रमाण है। पहली पारी में 26 रन की मामूली बढ़त लेने वाला बंगाल दूसरी पारी में 99 रन पर सिमट गया। इसके जवाब में जम्मू-कश्मीर ने संयम और आत्मविश्वास के साथ लक्ष्य हासिल कर इतिहास रच दिया। अब टीम खिताब से केवल एक कदम दूर है।






