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Formula-1 : ड्राइवर को सिर्फ रफ्तार नहीं, बल्कि तकनीक में भी होना होगा माहिर : हैमिल्टन

सात बार के चैंपियन हैमिल्टन ने 2026 में इंजन नियम बदलाव को F1 के लिए सबसे बड़ी चुनौती बताया

फॉर्मूला-1 के सात बार के विश्व चैंपियन लुईस हैमिल्टन ने 2026 से लागू होने वाले नए तकनीकी नियमों को अपने करियर का सबसे बड़ा और चुनौतीपूर्ण बदलाव बताया है। 2007 में एफ1 में पदार्पण करने वाले हैमिल्टन एक बार फिर ऐसे दौर में प्रवेश करने जा रहे हैं, जहां खेल की तकनीकी और रणनीतिक तस्वीर पूरी तरह बदलने वाली है। हैमिल्टन ने कहा कि ड्राइवर को अब सिर्फ रफ्तार नहीं, बल्कि तकनीक और मैनेजमेंट में भी माहिर होना पड़ेगा।

फेरारी की नई कार SF-26 के लॉन्च के दौरान स्काई स्पोर्ट्स एफ1 से बातचीत में हैमिल्टन ने कहा कि आने वाला नियम बदलाव ऐतिहासिक है। 2026 के नियमों के तहत इंजन पावर में 50:50 का बंटवारा होगा, जिसमें आधी पॉवर इंटरनल कंबशन इंजन और आधी इलेक्ट्रिक सिस्टम से आएगी। इसके अलावा कारें पहले से छोटी और हल्की होंगी, पारंपरिक DRS सिस्टम को हटाकर उसकी जगह एक्टिव एयरोडायनैमिक्स को लागू किया जाएगा।

हैमिल्टन ने कहा, यह सबसे बड़ा नियम बदलाव है जो मैंने अपने करियर में देखा है। हर बार जब नियम बदलते हैं, तो वह एक बड़ी चुनौती होती है। लेकिन इस बार हर कोई बिल्कुल शून्य से शुरुआत करेगा, जिससे प्रतिस्पर्धा का मैदान बराबर हो जाएगा। सब कुछ इस पर निर्भर करेगा कि कौन टीम तेजी से डेवलपमेंट करती है, किसके पास बेहतर आइडियाज हैं और कौन टीम एकजुट होकर एक ही दिशा में काम करती है। उन्होंने कहा कि 2026 का सीजन अब तक का सबसे तकनीकी साल होगा। ड्राइवरों को न सिर्फ तेज लैप्स लगाने होंगे, बल्कि पूरे लैप के दौरान पावर यूनिट और ऊर्जा के इस्तेमाल को भी बेहद सटीक तरीके से मैनेज करना होगा।

हैमिल्टन ने 2009 के नियम बदलाव का जिक्र करते हुए कहा कि उस समय बैटरी पावर का सीमित इस्तेमाल होता था, लेकिन इस बार यह सिस्टम कहीं ज्यादा जटिल और प्रभावशाली होगा। इसके साथ ही नए एक्टिव विंग सिस्टम को लेकर भी उन्होंने कहा कि फ्रंट और रियर विंग के मूवमेंट के कारण ड्राइवर की भूमिका और ज्यादा महत्वपूर्ण हो जाएगी।

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