Formula-1: रेड बुल के लिए अकेले मोर्चा संभालना बना वेर्स्टापेन की ताकत

Max verstappen:चार बार के फॉर्मूला-1 विश्व चैंपियन मैक्स वेर्स्टापेन (Max Verstappen) का मानना है कि 2025 सीज़न में खिताब की दौड़ के दौरान रेड बुल (Red Bull) की ओर से अकेले मोर्चा संभालना उनके लिए नुकसान नहीं, बल्कि एक तरह से फायदे का सौदा रहा। वेर्स्टापेन ने कहा कि जब टीम में एक ही ड्राइवर शीर्ष पर लड़ रहा हो, तो रणनीति और आक्रामकता दोनों के मामले में ज्यादा आजादी मिलती है।
2025 में रेड बुल ने अपनी ‘सेकंड सीट समस्या’ सुलझाने के लिए बड़ा दांव खेला था, लेकिन यह प्रयोग सफल नहीं हो सका। शुरुआती दो खराब रेस वीकेंड के बाद लियाम लॉसन (liam lawson) को टीम से बाहर कर दिया गया और उनकी जगह युकी सुनोदा (Yuki Tsunoda) को मौका मिला। हालांकि जापानी ड्राइवर भी लगातार अच्छे नतीजे देने में नाकाम रहे। नतीजतन, रेड बुल ने 2026 के लिए सुनोदा को रिजर्व ड्राइवर की भूमिका में भेजते हुए युवा इसैक हाजार (isack Hadjar) पर भरोसा जताया।
इस पूरे घटनाक्रम के चलते वेर्स्टापेन को 2025 के खिताबी मुकाबले में अकेले ही मैक्लारेन के दो ड्राइवरों लैंडो नॉरिस (Lando Norris) और ऑस्कर पियास्त्री (Oscar Piastri) का सामना करना पड़ा। सीजन के दूसरे हिस्से में उन्होंने अप्रत्याशित वापसी करते हुए खिताब की लड़ाई को रोमांचक बना दिया।
हालांकि, सुनोदा के आगे न होने से रेड बुल के पास रणनीतिक विकल्प सीमित थे, लेकिन वेर्स्टापेन को लगता है कि अकेले अग्रिम पंक्ति में होना उनके लिए फायदेमंद रहा। उन्होंने वायाप्ले (Viaplay) से बातचीत में कहा, “जब आप अकेले होते हैं तो आप ज्यादा आक्रामक हो सकते हैं और खुलकर हमला कर सकते हैं। मुझे यह स्थिति हमेशा पसंद रही है। अगर कारें लगभग बराबर हों, तो मैं दोनों मैकलरेन ड्राइवरों को शुभकामनाएं दूंगा, क्योंकि फिर वे आपस में ही तय कर लेंगे।”
वेर्स्टापेन का मानना है कि नॉरिस और पियास्त्री खिताब की दौड़ में एक-दूसरे से ही काफी अंक छीनते रहे, जिससे उन्हें अप्रत्यक्ष फायदा मिला।
चार बार के विश्व चैंपियन ने साफ कहा कि अगर वह किसी टीम के प्रमुख होते, तो वह हमेशा स्पष्ट नंबर-1 और नंबर-2 ड्राइवर तय करते। उन्होंने कहा, “एक नंबर-2 ड्राइवर ऐसा हो जो चैंपियनशिप के लिए जरूरी अंक दिला सके, लेकिन टीम में प्राथमिकता बिल्कुल साफ होनी चाहिए। मैक्लारेन के पास दो बराबर ड्राइवर थे, इसलिए रणनीति में उनसे कुछ चूक हुई और इसका फायदा हमें भी मिला।”






